सम्मेलन के 39वें महाधिवेशन में दिया
गया अध्यक्षीय संबोधन

डॉ. अनिल सुलभ

बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन का यह 39वाँ महाधिवेशन सम्मेलन की स्थापना के शताब्दी-द्वार को दस्तक दे रहा है।
      १७-१८ मार्च २०१८ को आहूत इस दो दिवसीय महाधिवेशन को संपन्न कर जब हम घर लौटेंगे तो,

पूर्व की क्षितिज पर, सम्मेलन के शताब्दी-वर्ष का प्रज्ज्वल सूर्य उदित हो रहे होंगे, जिसके दिव्य प्रकाश में, हिंदी का संसार और भी प्रदीप्त होगा। अंधकार के सारे पक्ष, दिव्य प्रभा में विलीन होकर सुवासित उषा का    आगे पढें..

इतिहास

कार्य समिति एवं सदस्यगण

उद्देश्य एवं नियमावली

उद्देश्य एवं नियमावली

1. संस्था का नाम:

इस संस्था का नाम

: बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ होगा।'
2. परिभाषा:

(क़)

संस्था/सम्मेलन से अभिप्राय है

: ‘बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन’

(ख)

समिति से अभिप्राय है

: संस्था की कार्यकारिणी समिति।
(ग)स्थायी समिति से अभिप्राय है: सम्मेलन की शीर्ष अधिकारिणी समिति
(घ) पदाधिकारी से अभिप्राय है: अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रधानमंत्री, प्रबंधमंत्री, साहित्यमंत्री, अर्थमंत्री आदि
(ड) वर्ष से अभिप्राय है: 1ली अप्रैल से 31 मार्च तक।
(च)ऐक्ट से अभिप्राय है : सोसायटीज रजिस्ट्रेशन ऐक्ट – 21, 1860.
3. विभाग:

सम्मेलन के उद्देश्य की सिद्धि के अभिप्राय से पूर्वोक्त कार्यों के लिए सम्मेलन के निम्नलिखित विभाग होंगे:-

(क) साहित्य विभाग
(ख) पुस्तकालय विभाग
(ग) कला विभाग
(घ) अर्थ विभाग
(ड) प्रबन्ध विभाग
(च) प्रचार विभाग
(छ) लोक भाषा विभाग

इन विभागों के अतिरिक्त स्थायी समिति आवश्यकतानुसार नये विभागों का भी संघटन कर सकती है।

4. सदस्य:

सम्मेलन के सदस्य निम्नलिखित तीन प्रकार के होंगे-

(1) आजीवन सदस्य
(2)संरक्षक
(3)वरीय संरक्षक।
5. आजीवन सदस्य:
(क) कोई भी वयस्क स्त्री या पुरुष जो सम्मेलन के उद्देस्यों और नियमों के अनुसार कार्य करना स्वीकार करेंगे, वह एक मुष्टि 1100/- रुपये शुल्क के साथ आवेदन पत्र देकर सम्मेलन के आजीवन सदस्य हो सकेंगे।
(ख) सम्मेलन के सभी भूतपूर्व पदाधिकारी स्वत: सम्मेलन के आजीवन सदस्य होंगे और उन्हें सदस्यता के लिए कोई शुल्क न देना होगा।
(ग) सम्मेलन की स्थायी समिति को यह अधिकार होगा कि किसी भी साहित्य सेवी को उनकी साहित्यिक सेवाओं के सम्मानार्थ सम्मेलन के आजीवन सदस्य के रुप में मनोनीत करें।
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